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फ़र्ज अपना-अपना समय कभी ठहरा नहीं ………..अम्बरीष श्रीवास्तव
Dec 14

लॉतिन अमेरी्की लो्क कथा-श्याम सखा ‘श्याम’ 
एक रेड इण्डियन बूढ़ा अपने पोते के साथ बैठा था। बूढ़े को दमे की बीमारी थी। सांस धौकनी की तरह चल रही थी उसकी छाती व पेट बुरी तरह हिल रहे थे। उसके दिल की धड़्कन उसकी दुबली पतली छाती में जोरों से धड़कती दिख रही थी। पोता अबोध बाल· था पूछ बैठा, ”दादा जी! यह आपके दिल में क्या हो रहा है।’
 बूढ़ा लम्बी साँस भरकर बोला, ”बेटा मेरे दिल में दो भेडिय़े हैं जो लड़ते रहते हैं। एक भेडिय़ा गुस्सैल और क्रोधी है तथा दूसरा प्यारा दिलकश व शान्त प्रकृति का है। 
 पोते ने फिर पूछा, ”इन में कौन जीतता है? 
 ”दादा ने कहा,  ”बेटे! वही जिसको मैं भोजन देता हूँ।
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